हर घर ने बलिदान दिया। किसी ने अपना बेटा दिया, किसी ने अपनी ज़मीन। आज़ादी की रात लोग रोए थे, खुशी के नहीं, अपने मरने वालों की याद में।
(अलसाया हुआ) मैम, ये सब तो हर साल होता है। स्कूल बंद रहेगा, मैं सोऊंगा। घर पर कार्टून देखूंगा। आज़ादी मिली तो मिली, अब तो बस छुट्टी चाहिए। play on independence day in hindi script
और मैं सबको एक प्रेरणा देती हूँ – ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ अब हमें बदलना है ‘तुम मुझे पढ़ाई दो, मैं तुम्हें तरक्की दूंगा।’ खुशी के नहीं
(आँखों में नमी) बच्चे, उस समय हम अंग्रेज़ों के गुलाम थे। हमारे ऊपर जुल्म होते थे। भारतीय सिपाही अपने ही देश में तीसरे दर्जे के थे। भूखे रहते थे, पीटे जाते थे। play on independence day in hindi script
(शिक्षिका जाती हैं।)
(रिया और आयुष दादी के पास बैठे हैं। दादी चरखा कात रही हैं।)